दलालों से गुलजार रहता है थाना वजीरगंज, यहां जबरन कराया जाता है सुलह !

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ए.आर.उस्मानी 
गोण्डा। भइया वक्त – वक्त की बात है। जहाँ पहले छुटभैया नेता और दलाल वजीरगंज थाना परिसर में घुसने से परहेज करते थे, वहीं आजकल ऐसे तत्व थाना परिसर को तो छोड़िए, थानेदार के बगल में बैठकर नमकीन के साथ चाय की चुस्कियां लगाते नजर आते हैं। ऐसे में फरियादियों को न्याय पाना टेढ़ी खीर से कम नहीं है। हद तो यह है कि यहां छोटी – बड़ी घटनाओं की एफआईआर दर्ज करने के बजाय पुलिस दलालों की बेज़ा दखलंदाजी के कारण जबरन सुलह समझौता कराकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देती है, जिसका नतीजा यह होता है कि कुछ दिन बाद ही मामूली विवाद, बड़ी घटना का रूप ले लेती है। इसके बावजूद वज़ीरगंज पुलिस सबक नहीं ले रही है।





         वज़ीरगंज पुलिस का विवादों से गहरा नाता रहा है। अभी पिछले दिनों ही यहां तैनात रहे दरोगा प्रमोद कुमार अग्निहोत्री को काम के बदले दाम लेने के मामले में जिले के तेज तर्रार पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार सिंह द्वारा लाइन हाजिर कर दिया गया था, लेकिन बेलगाम हो चुकी वज़ीरगंज पुलिस की सेहत पर इस कार्रवाई से कोई फर्क नहीं पड़ता है। आलम यह है कि ऊपरी कमाई के चक्कर में पुलिस दलालों के हाथों खेलने को मज़बूर है। सुबह होते ही सिपाही से लेकर एसओ तक कुछ छुटभैया नेताओं और दलालों से घिर जाते हैं। इसके बाद शुरू न्याय को रूपये के तराजू में तौलने का घिनौना खेल शुरू हो जाता है। फरियाद लेकर आये पीड़ितों की सुनवाई उनकी आर्थिक स्थिति के पैमाने पर की जाती है। गरीबों के लिए तो जैसे न्याय दूर की कौड़ी है। वे दिनभर थाने में भूखे प्यासे रहने के बाद शाम को निराश होकर बैरंग वापस लौट जाते हैं। 
   

वज़ीरगंज थाना परिसर में फरियादियों और दलालों का जमावड़ा
वज़ीरगंज थाना परिसर में फरियादियों और दलालों का जमावड़ा

    डुमरियाडीह के रामदेव को जब पुलिस चौकी से अपेक्षित न्याय नहीं मिला तब वह वज़ीरगंज थाने पर गया। वहां उसकी पूरी बात सुनने के बाद कहा गया कि कल आना। इस तरह उसे लगातार छह दिनों तक थाने की गणेश परिक्रमा करने के लिए मजबूर किया गया। जब वह थक गया तो उसने थाने पर बराबर मौजूद रहने वाले एक व्यक्ति के सम्पर्क में आया और उससे मदद की गुजारिश की। पीड़ित रामदेव को क्या पता था कि न्याय की आस में उसने जिस रसूख वाले व्यक्ति को पकड़ा है, वह पुलिस का दलाल है ! बहरहाल, आरोप है कि उसने चार हजार रुपए उस दलाल के माध्यम से पुलिस को दिया, तब जाकर उसे न्याय मिल सका। दबंगों द्वारा उत्पीड़ित लोग थाने की परिक्रमा लगाकर अपनी सिसकियों के साथ वापस लौट जाते हैं। तमाम लोग तो यहां फरियाद न सुने जाने के कारण थक हारकर उच्च अधिकारियों की चौखट पर सिर पटकने को मजबूर हैं। पीड़ितों की शिकायत पर उच्च अधिकारियों द्वारा थानेदार को दिया जाने वाला कार्यवाही का आदेश भी कुंभकर्णी नींद में सोई वज़ीरगंज पुलिस के लिए कोई मायने नहीं रखता है। ऐसे तमाम मामले हैं, जिसमें सीओ से लेकर एएसपी और एसपी तक के आदेश हुए, लेकिन बेलगाम पुलिस टस से मस तक न हुई। ऐसे में पीड़ित अपने दर्द व अपनी विवशता को अपने दामन में समेटे सिसकने के साथ आँसू बहाने पर मजबूर हो, थकहार कर सब कुछ भगवान भरोसे छोड़ खामोशी अख्तियार कर अपनी किस्मत को कोसते हुए मन मसोस कर बैठ जाते हैं।

 रूपये और रसूख के आगे सब बेकार !

       पीड़ित गरीबों के लिए यहाँ न्याय मिलना दूर की कौड़ी है। उनकी बातें यहाँ नक्कारखाने में तूती की आवाज बनकर रह जाती हैं। वहीं अगर चढ़ावे की बात आती है तो मामला चाहे कितना ही गलत क्यों न हो, पुलिस सारे नियम कानून को ताक पर रख देती है और पीड़ित के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने में भी देर नहीं करती है। यहां रूपये और रसूख के आगे न्याय की बातें बेमानी हैं।

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