सीएम के भी आदेश को ठेंगा दिखा रहा वजीरगंज का थानेदार !

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फरियादियों से अभद्रता कर वर्दी का रौब गालिब करना है उसका शगल

खुद को काबीना मंत्री रमापति शास्त्री का बताता है करीबी

ए.आर.उस्मानी
गोण्डा। सूबे के सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त आदेश जारी कर रखा है कि थानों, कोतवालियों के साथ ही आला हाकिमों की दहलीज़ पर अपनी फरियाद लेकर आने वाले पीड़ितों त्वरित, सरल और सुलभ न्याय मुहैया कराया जाय तथा आगंतुकों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाए, लेकिन उनके इस आदेश को वजीरगंज का बेलगाम थानाध्यक्ष विनय कुमार सरोज ठेंगा दिखा रहा है !



        वजीरगंज थाना क्षेत्र के नगवा गांव की अमरावती 5 अक्टूबर को अपने सहन की जमीन पर झाड़ू लगा रही थी कि इसी बीच गांव के दबंग दीप नरायन अपने 4 अन्य साथियों के साथ आया और उसे बुरी तरह मारने पीटने लगा। किसी तरह भागकर वह थाने पहुंची। आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों से मिलकर मुकदमा दर्ज करने के बजाय उसे थाने से भगा दिया ।
    परसहवा के रमाकांत पाण्डेय का बालेश्वरगंज में गोंडा – फैजाबाद हाईवे पर मकान बना है। 20 अगस्त को उसके पड़ोसी तेज बहादुर सिंह ने मकान कब्जा कर लिया। आरोप है कि जब पीड़ित अपनी फरियाद लेकर थाने पर आया,  तो उसको थानाध्यक्ष विनय सरोज ने बैठा लिया और उसके साथ बदसलूकी की।
       26 सितंबर 2017 को जलालपुर की सरोज नन्दिनी की मामी केवलपती से बैनामा लिया था।   आरोप है कि गांव की श्रीमती पुष्पा देवी समेत 8 लोग मिलकर उक्त जमीन पर जबरन नींव खोदवाने लगे। पीड़िता थाने पर गयी तो उसकी मदद करने के बजाय बेलगाम पुलिस ने उसे भी थाने से भगा दिया।
      ये घटनाएं तो महज बानगी हैं। वजीरगंज पुलिस के ऐसे कारनामे अनगिनत हैं, जो मित्र पुलिस के दामन पर दाग़ लगाने के लिए काफी हैं। 9 अक्टूबर को फैजाबाद के अयोध्या निवासी सुनील गुप्ता एक मामले में सुलह समझौता कराने की मंशा के तहत वजीरगंज थाने पर पहुंचे। आरोप है कि थानाध्यक्ष विनय सरोज उनसे अकारण ही भिड़ गए। हद तो तब हो गई जब बेखौफ़ थानेदार ने पेशे से पत्रकार सुनील गुप्ता को भद्दी भद्दी गालियां देते हुए गिरेबान पर हाथ डाल दिया। इतना ही नहीं, बौखलाए थानाध्यक्ष ने उसकी मोबाइल छीनकर फर्स पर पटक दिया, जिससे वह टूट गई। आपा खो चुके विनय सरोज ने पत्रकार को थाने से भगा दिया। इसकी लिखित शिकायत आज पीड़ित पत्रकार ने अपर पुलिस अधीक्षक से की है। एएसपी ने उसे जांचोपरांत थानाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई का भरोसा दिया है।

आला अधिकारियों के दरवाजे पर दस्तक दे रहे पीड़ित

अंजू बाला खैरहनी, एहसान उल्ला विरहमतपुर, विक्रम सहिबापुर, रामनरेश भरहापारा…। ये उन लोगों के नाम हैं, जिनकी थाने पर सुनवाई नहीं हुई, तो अपनी पीड़ा बताने के लिए डीआईजी, एसपी या एएसपी की चौखट पर न्याय के लिए लोगों को अर्जी देनी पड़ी है। इसके अलावा ऐसे लोगों की फेहरिस्त अभी और लंबी है, जिनकी पीड़ा सुनने या बांटने के बजाय पुलिस ने उन्हें अपमानित किया। ऊपर तक अपने रसूख का हवाला देकर एसओ विनय सरोज अक्सर लोगों को बैरंग वापस कर देता है।

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