भगवान राम के 14 वर्ष वनवास काटकर वापस अयोध्या आने पर मनाई गई थी दिवाली

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* हिन्दू धर्म की आस्था की प्रतीक है दीपावली

* कार्तिक मास के अमावस्या को मनाया जाता है यह पर्व

डॉ.एन.के.मौर्य
वजीरगंज – गोण्डा। भगवान गणेश व माँ लक्ष्मी के प्रति समर्पित पवित्र दीपावली हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाई जाती है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ सफाई करके रात्रि में माँ लक्ष्मी की अपार कृपा पाने के लिए पूरे विधि विधान से उनकी पूजा अर्चना करते हैं, साथ ही अपने घरों को जगमग करने के लिए घी व तेल के दीप जलाते हैं।



       दीपावली का त्योहार हिन्दू धर्म का सबसे प्रिय पर्व है, जो पूरे भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। माना जाता है कि इस रात्रि माँ लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करके अपने प्रिय भक्त के घर में प्रस्थान करके उन्हें धन धान्य से अनुग्रहित करती हैं। इसलिये सभी लोग माँ लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए विधिवत तरीके से उनकी पूजा अर्चना करते हैं।

* दीपावली पर्व के पीछे जुड़ी हिन्दू मान्यताएं

दीपावली मनाने के पीछे कई मत हैं। कुछ का मानना है कि एक दिन भगवान विष्णु ने राजा बलि को पाताल लोक का राजा बनाया था, जिससे देवलोक सुरक्षित बच गया था। तब भगवान विष्णु व राजा इंद्र ने खुशी प्रकट करते हुए घी के दीये जलाये थे। यही उत्सव आगे चलकर त्योहार बन गया, वहीं दूसरा मत यह है कि इसी दिन क्षीर सागर से लक्ष्मी जी प्रकट हुई थीं,  जिसने भगवान विष्णु को अपना पति स्वीकार किया था, जिसके चलते लोगों ने खुशियों के दीप जलाये।  तीसरा मत है कि इसी दिन राजा विक्रमादित्य ने अपने संवत की रचना की थी,जिसका मुहुर्त बड़े बड़े विद्वानों द्वारा निकलवाया था कि नया संवत चैत्र सुदी प्रतिपदा से चलाया जा सके। बताते चलें कि राम के अयोध्या वापसी का मत सबसे प्रचलित मत है। इसी दिन भगवान राम 14 वर्ष का वनवास काटकर लंका के राजा रावण का वध करके सीता सहित अयोध्या पहुंचे थे। उनके आने की खुशी में अयोध्या वासियों ने दीप जलाकर अयोध्या नगर को सजाया था। तभी से यह दीवाली मनाई जा रही है।

* पर्व से जुड़ी है सिखों की आस्था

बताते चलें कि मुगलों द्वारा ग्वालियर के किले में कैद 52 हिन्दू राजाओं को इसी दिन जंग करके मुगलों के अत्याचार से आजाद करवाया था, जिसके खुशी में  हिन्दू व सिख दोनों समुदाय के लोगों ने इस दिन मिल जुलकर दीप जलाये थे, जो रिवायत आज भी कायम है।

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