मठाधीशों के नाक का सवाल बनी नौबस्ता की सरकारी राशन की दुकान!

 
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संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा ‘कोटा’, भयावह हो सकता है परिणाम

ए. आर. उस्मानी / मुश्ताक अहमद
गोण्डा। वजीरगंज की ग्राम पंचायत नौबस्ता के सरकारी राशन की दुकान अब दो मठाधीशों के नाक का सवाल बन गयी है। सूत्रों के मुताबिक कोटा प्रकरण गम्भीर संघर्ष की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है। यदि समय रहते इसका पटाक्षेप न किया गया तो परिणाम भयावह हो सकते हैं।



   घटना की शुरुआत गांव के कोटेदार शानलाल की मौत के बाद नये कोटे की दुकान के चयन से हुई। मृतक कोटेदार के पुत्र देवीदीन ने मृतक आश्रित होने का दावा करते हुए कोटे की दुकान की मांग की, जो प्रधान पक्ष के लोगों को नागवार गुजरी और चयन फंस गया। विवाद बढ़ता देख तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर ग्राम पंचायत में खुली बैठक कर कोटा विवाद निपटाने का प्रयास किया गया। बैठक में मृतक के आश्रित देवीदीन के दावे को खारिज करते हुए नये कोटेदार के चयन की औपचारिकता पूरी कर दिसम्बर 2016 में दुकान का आवंटन भी कर दिया गया। सत्ता परिवर्तन के बाद बीते सितम्बर माह में खाद्यान्न आदि वितरण में अनियमितता के आरोप में दुकान निलम्बित कर दी गई। तब से एक पक्ष जहां बहाली को लेकर प्रयासरत है, वहीं दूसरा पक्ष दुकान निरस्त कराने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए है। विवाद के पटाक्षेप के लिए जिलाधिकारी ने सक्षम अधिकारी की देख-रेख में खुली बैठक कर कोटा विवाद का निस्तारण करने का निर्देश दिया था, जिसके लिए 2 दिसम्बर को अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की मौजूदगी में ही दोनों पक्ष आपस में भिड़ गये। खूब लात-मूके चले। पत्थरबाजी भी हुई। एक पक्ष द्वारा फायरिंग का आरोप भी लगाया जा रहा है। ये सब कुछ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ।
       सवाल यह उठता है कि बिना सुरक्षा व्यवस्था के अधिकारी मीटिंग करने क्यों गये? यदि इस विवाद में कोई गम्भीर घटना हो जाती तो इसकी जवाबदेही किसकी होती? सूत्रों का कहना है कि यदि नौबस्ता के कोटा विवाद का पटाक्षेप नहीं किया गया, तो गांव में कभी भी बड़ी वारदात को अंजाम दिया जा सकता है। इसकी पृष्ठभूमि भी तैयार हो चुकी है!

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