दिल्ली पुलिस का जांबाज कांस्टेबल संदीप कुमार बना हेलमेट मैन!

अगर आप में है जज्बा सत्य को खोज कर सामने लाने का इरदे हैं नेक हौसला है बुल्नद, और बनना चाहते हैं सच्चे कलम के सिपाही करना चाहते हैं राष्ट्र सेवा तो फोन 9971662786 Email - indiaa2znewsdelhi@gmail.com पर भेजे या वाट्सअप 8076748909, पर संपर्क करें। ए 2 जेड समाचार वेब में छपे समाचारों व लेखों में सम्पादक की सहमति होना आवश्यक नहीं है। समाचार एवं लेखों का उत्तरदायी स्वयं लेखक होगा। मों. न.-9971662786

तकरीबन 500 से अधिक लोगों को गिफ्ट कर चुके हेलमेट

अनीता गुलेरिया
दिल्ली। दिल्ली में हेलमेटमैन के नाम से पहचाने जाने वाले संदीप कुमार अपने वेतन का लगभग आधा हिस्सा हेलमेट बांटने पर खर्च करते हैं। वे तकरीबन दो साल के अंदर 500 से ज्यादा लोगों को हेलमेट गिफ्ट कर चुके हैं। संदीप दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल पद पर तैनात हैं। उनका वेतन चालीस हजार रूपये महीना है।  सब लोग प्यार से उन्हें हेलमेट मैन और हेलमेट भाई  कहते हैं।



      22 दिसंबर को शादी की दसवीं सालगिरह पर उन्होंने और उनकी पत्नी ने करीब 20 महिलाओं को हेलमेट गिफ्ट किए। संदीप ने इस पर करीब सत्रह हजार रुपये खर्च किए। इन महिलाओं के चालान उन्होंने खुद ही काटे थे। बिहार प्रांत के मूल निवासी संदीप कहते हैं कि ऐसा उन्होंने इसलिए किया ताकि नियम तोड़ने वालों के चालान का पैसा सरकारी खजाने में जमा हो और फिर हेलमेट देकर इन चालान कटने वाले लोगों को सड़क नियमों के प्रति जागरुक किया जाए, जो आए दिन नियमों की अनदेखी कर सड़कों पर वाहन चलाते हुए अपनी जिंदगी को खुद ही खतरे के मोड पर रखते है।
         दिल्ली पुलिस के जांबाज सिपाही संदीप कुमार ने ‘Indiaa2z News’ संवाददाता को बताया कि पहले वह सालगिरह, होली, दीवाली जैसे मौकों पर हेलमेट बांटते थे, लेकिन अब वह हर तरह के त्योहार पर हेलमेट बांटने लगे हैं। किसी आयोजन में भी जाते हैं तो हेलमेट ही गिफ्ट करते हैं। संदीप ने अपनी शादी की सालगिरह पर पहली बार उन ऐसी महिलाओं को चुना जिनका हेलमेट ना पहनने के कारण चालान कटा हुआ था। संदीप के अनुसार, मैं हर दिन होने वाले 413 से भी ज्यादा सड़क हादसों को लेकर बेहद आहत हूं। उन्होंने बताया कि दोपहिया चालकों की सबसे ज्यादा मौत एक्सीडेंट के दौरान हेड-इंजरी होने से ही होती है। इसलिए मैंने दो साल पहले संकल्प लिया था कि मेरे घर में कोई भी आयोजन होगा तो अपने परिवार के साथ मिलकर लोगों को हेलमेट बांटूंगा। मैं घूमने फिरने और दूसरे गैरजरूरी कामों में पैसे खर्च करने की बजाए, हेलमेट खरीदता हूं। मेरा आधा वेतन इसी में खर्च हो जाता है लेकिन इसके बावजूद मेरी पत्नी मेरे इस काम में मेरा पूरा सहयोग देती है। मेरा यह मानना है कि हर नाके पर ड्रंकेन – ड्राइविंग को चेक करने जैसे उपायों से सड़क हादसे कम होंगे। बहरहाल, इस जांबाज सिपाही के बुलंद हौसलों को ‘Indiaa2z News’ परिवार सैल्यूट करता है।

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