जमीन बैनामा करने के 39 साल बाद मुकरा विक्रेता !

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सन 1979 में अर्जुन ने किया था ज्ञानदेव के नाम बैनामा

अब मकान निर्माण में डाल रहा अड़ंगा 

डॉ. एन. के. मौर्य 
वजीरगंज, गोण्डा। स्थानीय थाना क्षेत्र के ग्राम दरवाजा का निवासी अर्जुन मौर्य सारे नियम क़ानून को ताक पर रखकर अपने ही द्वारा करीब 39 साल पहले किए गए बैनामे की जमीन को कब्ज़ा करने की नियत से क्रेता से तब जान से मारने की धमकी देते हुए उलझ गया जब वह अपनी भरी बुनियाद पर मकान बनाने के लिए उसकी सफाई कर रहा था। बैनामेदार के पीड़ित पुत्र ने प्रकरण की तहरीर जहाँ एक तरफ थाने में देकर न्याय की गुहार की है, वहीं दूसरी ओर उपजिलाधिकारी ने पीड़ित के प्रार्थना पत्र पर थानेदार को मामले की जांच कर अनावश्यक अवरोध पैदा करने वाले के विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया है।



        योगी सरकार का सख्त निर्देश है कि पीड़ितों की समस्याएं सुनकर उसका शीघ्र निदान किया जाए, साथ ही जालसाजों पर सख्त दंडात्मक कार्यवाही करके उनके नापाक इरादों पर कानूनी लगाम कसा जाय, ताकि किसी पीड़ित को दर दर न भटकना पड़े। मगर वजीरगंज के ग्राम दरवाजा का रहने वाला युवक अर्जुन मौर्य सारे नियम कानून को ताक पर रखकर खुलेआम उसकी धज्जियाँ उड़ाने में जुटा हुआ है।  12 जुलाई सन 1979 में अर्जुन मौर्य पुत्र कल्पनाथ ने ग्राम भगोहर के मजरे जमदारपुरवा निवासी स्वर्गीय ज्ञानदेव मौर्य को गोण्डा फैजाबाद मार्ग स्थित मछली मंडी के सामने अपनी जमीन का बैनामा किया था, जिस पर बैनामेदार ने अपनी बुनियाद भर रखी थी, तत्पश्चात उक्त जमीन पर ज्ञानदेव मौर्य दाखिल खारिज की हैसियत से बने रहे। इसी बीच कुछ साल पहले उनका देहांत हो गया और उनका बेटा रमेश कामकाज के चक्कर में बाहर रहने लगा। बताया जाता है कि काफी दिनों तक जमीन ज्यों की त्यों पड़ी रही। इसी बीच बैनामा कर्ता की ललचाई नज़रें उस पर गड़ गयीं और मन ही मन में उसे हासिल करने की ललक यहाँ तक बढ़ गयी कि जब 6 जनवरी 2018 को जमीन क्रेता का बेटा उक्त जमीन पर मकान बनवाने हेतु नींव की सफाई कर रहा था, तो अर्जुन कुछ साथियों संग अपने बेटे बब्बन को लेकर वहां आ धमका और कहने लगा कि यहाँ क्या कर रहे हो? ये जमीन हमारी है, हमने किसी को नहीं बेचा है। इसके साथ ही गाली गलौज करते हुए पीड़ित को जान से मारने की धमकी भी दी, जिस पर रमेश ने बैनामे की बात करते हुए उसके कागजात की भी बात की, मगर जमीन की लालच इस कदर बढ़ चुकी थी कि वह एक न माना।  मरता क्या न करता। मौके की नजाकत देख रमेश वहां से हट गया और थाने में जाकर प्रकरण की तहरीर देते हुए न्याय की मांग की है।

* एसडीएम ने दिया अवैध हस्तक्षेप रोकने का निर्देश

जालसाजों से त्रस्त पीड़ित ने एसडीएम तरबगंज को प्रकरण से अवगत कराते हुए न्याय का दामन फैलाया है, जिसके उपरान्त उपजिलाधिकारी ने वजीरगंज के थानाध्यक्ष को मामले की जांच कर अवैध हस्तक्षेप रुकवाने का फरमान जारी किया है।

* जब पीड़ित के ही घर रात्रि 11 बजे जा धमकी पुलिस

वजीरगंज पुलिस के तो खेल ही निराले हैं। यहाँ न्याय का दामन फैलाने वालों पर ही पुलिस की निगाहें तनती हैं, जिसका ताजातरीन उदहारण उक्त प्रकरण का है। पीड़ित रमेश ने बताया कि उसके पास बैनामे के कागजात एवं सारे साक्ष्य उपलब्ध हैं। इसके बावजूद थाने की पुलिस उसके घर रात्रि 11 बजे जाकर उसकी बहन से इस कदर पूछताछ कर रही थी मानो वह कोई बड़ा अपराधी था।

* क्या कहते हैं नवागत थानाध्यक्ष

प्रकरण के सन्दर्भ में नवागत थानेदार विनोद कुमार सरोज का कहना है कि रात्रि में पीड़ित के घर जो पुलिसकर्मी गया है उसके बारे में मैं बिल्कुल नहीं जानता। पीड़ित मेरे पास आएगा तो जांचोपरांत उचित कार्यवाही की जायेगी। यहाँ हैरान करने वाली बात तो यह है कि बीट सिपाही अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए हैं और थानेदार बेखबर हैं!

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