नसबंदी के 6 साल बाद बच्ची को दिया जन्म

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 न्याय के लिए सात वर्षों से लगा रही है सीएमओ का चक्कर

ए.आर.उस्मानी / डॉ.एनके मौर्य
गोण्डा। गरीबी की आग में झुलसती एक महिला ने सीमित बच्चों के लिए जिले के सीएचसी वजीरगंज में  आयोजित शिविर में नसबंदी करवाया, बावजूद इसके उसके कोख से 6 वर्ष बाद एक बच्ची ने जन्म लिया, तभी से महिला न्याय की तलाश में सी.एच.सी. से लेकर सीएमओ तक एड़ियां घिस रही है, मगर उसकी व्यथा सुनने की बजाय विभागीय अधिकारी व कर्मचारी उसे 7 वर्षों से दौड़ा रहे हैं।



          गोण्डा के वजीरगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र के ग्राम पूरे डाढू निवासी लालबहादुर मिश्रा गरीबी की आग मे झुलसकर किसी तरह अपना व परिवार का पेट पालते हैं। 10 दिसंबर सन 2010 को  सीएचसी वजीरगंज में नसबंदी शिविर लगा, जिसमें लाल बहादुर की पत्नी श्रीमती रंजू मिश्रा ने जाकर बच्चों की संख्या सीमित रखने की मंशा के तहत तत्कालीन चिकित्साधिकारी की देखरेख में नसबंदी करा लिया, जो आगे चलकर उसकी दुश्वारियों का सिला बन गया,  6 वर्षों के बाद 2 नवंबर 2016 को रंजू ने न चाहते हुए भी एक बच्ची को जन्म दिया। तब  से लेकर आज तक पीड़ित रंजू सारे कागजात लेकर परिवार नियोजन इंडमिनिटी योजना के अंतर्गत मिलने वाली क्षतिपूर्ति धनराशि के लिए सी.एच.सी. वजीरगंज के चिकित्साधिकारी व कर्मचारियों से लेकर मुख्य चिकित्साधिकारी तक के सामने पहुँच कर न्याय की गुहार लगा रही है, लेकिन उसके दर्द की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है। पीड़िता ने बताया कि वह अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। वहीं सीएमओ ने इस प्रकरण से अनभिज्ञता जताई और कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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