पिता की पगड़ियों का मान …..

पिता की पगड़ियों का मान ********************* मेरी  बेटियों तुम कॉलेज जाना पर बालों में फूल मत लगाना तुम देखना रास्ते के भूखे फूलों  को पढ़ना उनकी फटी झोलियों को किन धागों  की जरूरत  है? तुम […]

बाँध बिस्तरे चाल पड़े माँ, करण मोल इब …..

बाँध बिस्तरे चाल पड़े माँ, करण मोल इब रोजी का काळ टाळ  कर जावै  बेशक ,टेम उकै  ना फौजी का गेहूँ बो दिये किल्ले भर दिये, पकी फसल तक आ लूंगा बैंक के काम जो […]

दर्द……….

दर्द………. ये दर्द का बाजार है, यहां हर दुकान पर दर्द सजा है ना खुशियां मिलेंगी मस्ताने, यहां बिकता दर्द सदा है वो जो फ़ानूस पर चमक रहा है, दर्द का मारा हुआ है खुद […]

फटी जेब वाले पापा …….

फटी जेब वाले पापा ………………………. बहुत रंगीन थे वे धागे जिनसे पिता का कुर्ता बना था पर परिवार की ख्वाहिशों ने उन्हें सफेद कर दिया यूँ ही नहीं उड़े ये रंग बरसों खड़े रहे वह […]

मैंने हर आँख में नफरत का समन्दर देखा लबों से दोस्त कहें, दुश्मनी अंदर देखा

मैंने हर आँख में नफरत का समन्दर देखा लबों से दोस्त कहें, दुश्मनी अंदर देखा मैं तो बस प्यार का दीवाना था समझा ही नहीं गले से मिल लिया, हाथों में न खंजर देखा देखा […]

वक्त के दुशाले पे…………..

वक्त के दुशाले पे ………………………..    वक़्त के दुशाले पे    बड़े पैबंद थे    फटे थे मैले थे     बड़े कसीदे किये मैंने     बड़े बेल-बूटे सजाये थे     आज जब मेरी कारीगरी ने […]

मजबूरी ……………..

………..मजबूरी ………. कोई तो मजबूरी रही होगी शायद आखिर क्यों रचनाकार ने मिटा दी संसार की अनुपम रचना आने वाले कल का अपना ही वजूद आखिर उसी ने तो एक पहचान दी थी ममता से […]

ये धूप छाँव की आंख मिचौली कभी रूदन कभी हंसी ठिठोली

जीवन पथ इतना सरल नहीं है! ………………………………….. ये धूप छाँव की आंख मिचौली कभी रूदन कभी हंसी ठिठोली सम बहाव की जीवन धार नहीं है जीवन पथ इतना सरल नहीं है! जीवन पथ का तू […]