गाँधी तुमको आना होगा…….

गाँधी तुमको आना होगा, भ्रष्ट हो गयी धरती तुम्हारी, जन कल्याण के हेतु गाँधी, जन्म तुम्हें फिर लेना होगा। सत्य अहिंसा की राह दिखाया, फिरंगियों से मुक्त कराया, प्रेम सद्भावना के ऊंच शिखर का, जनमानस […]

ज़िंदगी खुली किताब रहे……

ज़िंदगी खुली किताब रहे…… ना दुखों का लेखा – जोखा हो, ना सुखों का हिसाब रहे, गुजरी है जैसी अब तक, ये जिंदगी यूं ही लाजवाब रहे ! वक़्त की हवाएँ पलट दे पन्ने, पर […]

चलते रहो ज़िंदगी सिखाती है……………….

चलते रहो ज़िंदगी सिखाती है बन के गहना खुशियां ही सजाती हैं, चलते रहो जिंदगी सिखाती है……. आसमान भी आपका, जमीं भी आपकी, सपने जो सजाने हैं तो नींद आपकी….. कुछ मुश्किलों से हैं भरी […]

वाह री पुरुषवादी सोच…..

वाह री पुरुषवादी सोच….. आवाज़ हमारी दबा दी जाएगी  और तस्वीर दुर्गा कहलाएगी  बात बात पर निकली माँ की गाली  नौ दिन को जय माता की हो जाएगी  आज तन नोंचते सारे हाथ  माता को […]

पत्तों के झुरमुट में जब कहीं चाँद का दीप जले  तन्हाई में साथ निभाने छाया भी मेरे साथ चले

पत्तों के झुरमुट में जब कहीं चाँद का दीप जले  तन्हाई में साथ निभाने छाया भी मेरे साथ चले बिखर चांदनी की चादर पर मेरी यादें आट करे कारे कारे काजल के चंदा भी जब […]

…इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद

मोहर्रम पर विशेष………… ‘मोहर्रम’ इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने का नाम है। इसी महीने से इस्लाम का नया साल शुरू होता है। इस महीने की 10 तारीख को रोज-ए-आशुरा (Day Of Ashura) कहा जाता है। […]

मुझको भुलाकर एक पल भी रह न पाओगे आएगी याद मेरी तो आंसू बहाओगे

  *** डा0 एन.के. मौर्य की कलम से मुझको भुलाकर एक पल भी रह न पाओगे आएगी याद मेरी तो आंसू बहाओगे कोई न आएगा तेरे अश्कों को पोछने बस याद करके मुझको रोते ही […]

यूं पहचान अपनी भुलाने लगे हैं लो गैरों के गुणगान गाने लगे हैं

यूं पहचान अपनी भुलाने लगे हैं लो गैरों के गुणगान गाने लगे हैं अदब और तहज़ीब अपनी भुला हम बहुरूपिए से नज़र आने लगे हैं। लगी पश्चिमी ये हवा जो सभी को खुदी को ही […]