कहीं प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ही सांसद पर तो नहीं साधा निशाना ?

नकल माफियाओं पर पीएम की तल्ख़ टिप्पणी के बाद शुरू हुई कयासबाजी

 कीर्तिवर्धन सिंह की तारीफ के पुल बांधना भी बना चर्चा का विषय

ए. आर. उस्मानी

गोण्डा। किसी भी देश का प्रधानमंत्री यदि छोटे से जिले में बड़े पैमाने पर परीक्षाओं में नकल के कारोबार की बात करे, वो भी सार्वजनिक मंच से, तो नि:संदेह व्यवस्था में खामियों पर सवालिया निशान लगना तय है! बात जब किसी राजनीतिक मंच से की गई हो, तो सियासी गलियारों में इस पर नुक्ताचीनी और कयासबाजी तो होगी ही। अगर सही मायने में देखा जाए तो पीएम की गोण्डा में परीक्षाओं में कराए जाने वाले नकल पर की गई तल्ख़ टिप्पणी कहीं न कहीं अपनी ही पार्टी के सांसद की तरफ इशारा करती है!
शुक्रवार को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लखनऊ रोड पर स्थित चौपाल सागर के पास बीजेपी की परिवर्तन संकल्प रैली को संबोधित करने आए, तो शायद वे दिल्ली से ही यह तय करके आए थे कि बड़े – बड़ों को बेनकाब करेंगे! हुआ भी वही। पीएम जब बोलना शुरू किए, तो गन्ना किसानों की बदहाली से लेकर नकल माफियाओं की खुशहाली तक का बखान कर डाले। रैली स्थल पर उमड़े जनसैलाब के बीच उन्होंने जब गोण्डा जैसे अति पिछड़े और छोटे जिले में बड़े स्तर पर संगठित तरीके से नकल के कारोबार की बात कही, तो जनता के साथ – साथ मंचासीन नेतागण भी अवाक् रह गए। पीएम ने कहा कि गोण्डा हर मायने और हर क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखता है, लेकिन इसकी एक तस्वीर यह भी है कि इस छोटे से जिले में बड़े पैमाने पर नकल का कारोबार चलता है। उनका इतना कहना था कि मंचासीन नेतागण अवाक् रह गए। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि भाइयों – बहनों, हमें सब पता है। यहां परीक्षा केंद्रों की बोली लगाई जाती है। विज्ञान के पेपर का 10,000 रुपए लिया जाता है, तो गणित का 8 हजार। इस प्रकार अलग – अलग विषयों का अलग – अलग रेट फिक्स है। ये आने वाली पीढ़ी को तबाह करके रख देगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सनसनीखेज खुलासे से पहले गोण्डा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह की भूरि – भूरि प्रशंसा कर चुके थे। उन्होंने भाषण शुरू करने के बाद कीर्तिवर्धन का कई बार नाम लेते हुए उनकी तारीफों के पुल बांध दिए, जबकि कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक बार भी नाम नहीं लिया। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं पीएम का इशारा सांसद बृजभूषण शरण सिंह की ओर ही तो नहीं था ?
दरअसल, इसे प्रमाणित करने के लिए तर्क दिया जा रहा है कि पिछले साल सांसद बृजभूषण शरण सिंह के नंदिनी नगर महाविद्यालय में अवध विश्वविद्यालय के सचल दल द्वारा सामूहिक नकल पकड़ी गई थी। इंतिहा तो यह रही कि पुलिस – बल आने के बाद उड़ाका दस्ते को काॅलेज के अंदर जाने दिया गया था। इनके साथ ही, मंत्री पंडित सिंह के भी काॅलेज में सामूहिक नकल कराते हुए पकड़ा गया था। कहा जाता है कि प्रधानमंत्री ने सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर ही निशाना साधा है। वैसे चाहे जो भी हो, पीएम के तीर सही निशाने पर लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में इस पर बहस और गुणा – भाग किया जा रहा है। माना जाता है कि यदि प्रधानमंत्री के निशाने पर कैसरगंज सांसद बृजभूषण सिंह ही थे, तो निकट भविष्य में ये उनके लिए शुभ संकेत नहीं हैं !

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *