एसपी से भी झूठ बोलता है मनकापुर कोतवाल !

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दबंग ने खुलेआम की महिला पत्रकार की पिटाई, जख्मों पर नमक छिड़कते रहे इंस्पेक्टर

 पुलिस अधीक्षक के आदेश के बाद दर्ज हुआ एनसीआर

ए.आर.उस्मानी
गोण्डा। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर योगी सरकार कितनी भी सजग क्यों न हो, लेकिन जिले में बैठे उनके कारिंदे ही सरकार की मंशा को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं। हद तो यह है कि सरेबाज़ार एक महिला पत्रकार को दबंग द्वारा बुरी तरह मारने पीटने के मामले में कोतवाल ने कठोर कार्रवाई करने के बजाय पुलिस अधीक्षक को भी गुमराह करने का दुस्साहस कर डाला। उसने ना सिर्फ उन्हें गुमराह किया, बल्कि एसपी के निर्देश को भी ठेंगा दिखाते हुए पत्रकार द्वारा दी गयी तहरीर को तोड़ मरोड़कर मामूली धारा में महज एनसीआर दर्ज किया।





        जब तक कानून के सिस्टम में कुछ भ्रष्ट अधिकारियों का अंगद रूपी पैर कायम रहेगा, तब तक महिलाओं पर जुल्म ज्यादती होती रहेगी और अधिकारी ऊँचे रसूख के तलवे चाटकर पीड़ितों को न्याय के बजाय दबंगों का साथ देकर उनके घृणित अंजाम को हवा देते रहेंगे। महिला, वो भी पत्रकार पर जुल्मो सितम की एक ऐसी ही दास्तान गोण्डा जिले के मनकापुर कोतवाली क्षेत्र का है, जहाँ दबंग किस्म के लोगों का सिक्का चलता है। इन्हीं में से एक हैं दिनेश पाण्डेय, जो एक दैनिक अखबार का पत्रकार है। चर्चा का विषय है कि दबंगई के चलते कुछ ऊँचे रसूख़ वालों से साठगांठ कर ये पहले भी मनकापुर में कई घृणित खेल अंजाम दे चुका है। आरोप तो यह भी लगाया जाता है कि पुलिस का वह ‘हमदर्द’ है, जिससे यहाँ की पुलिस भी वही करती है जो उक्त पत्रकार  चाहता है। और तो और, इससे मिलकर यहाँ के मिठाई विक्रेता भी खुलेआम खोया में भारी मिलावट करके ग्राहकों को ठगी का शिकार बनाते हैं और पुलिस मात्र तमाशबीन बनकर अपनी जेब भरने में लगी रहती है।

         यहाँ पत्रकार की दबंगई का खेल 16 जुलाई को तब देखने को मिला, जब एक महिला पत्रकार सरोज को रेलवे स्टेशन के समीप स्थित मिठाई की दुकान पर बिक रहे नकली खोया के विरुद्ध फोटोग्राफी व न्यूज़ कवरेज के समय मिठाई विक्रेताओं के कहने पर बेख़ौफ़ पत्रकार खुद का रूतबा कायम करने के लिए मानवता को तार तार कर महिला पत्रकार का हाथ पकड़ कर दुकान के अंदर घसीटने लगा जिसका विरोध करते हुए जब वह खुद को बचाकर किसी तरह बाहर आयी तो आरोप है कि दिनेश ने उसे भद्दी भद्दी गालियां देते हुए जमीन पर पटक कर लात घूसों से मारना शुरू कर दिया। इससे भी जब जी न भरा तो उसने क्रूरता अपनाते हुए कहा कि ऐसा कर दूंगा कि तुम किसी को मुँह दिखाने के काबिल नहीं रहोगी।

     

पीड़ित पत्रकार सरोज मौर्या
पीड़ित पत्रकार सरोज मौर्या

     किसी तरह से अर्ध बेहोशी हालत में वह स्टेशन की ओर भाग कर जान बचायी। पीड़िता का आरोप है कि  अपराध छिपाने की नियत से मानवता को तार तार करने वाले इस आरोपी ने मारपीट करने के बाद खुद ही कोतवाल को फोन करके यह बताया कि यहाँ महिला पत्रकार जबरन दुकानदारों से रुपये वसूल रही है। पीड़िता ने बताया कि उसके घर वाले उसे बेहोशी की हालत में घर ले गए। आनन फानन में कोतवाल को तहरीर दी गयी जिसमें अधूरा प्रकरण दर्शाया गया था। आरोप है कि पीड़िता को दुकानदारों से मिलकर उक्त पत्रकार ने काफी देर तक बंधक भी बनाया था और मारने पीटने के दौरान उसके पर्स को भी छीन लिया था, जिसमें नर्सिंग एडमिशन हेतु रखे 10 हज़ार रुपये भी थे। बहरहाल, रात में जब पीड़ित परिजन कोतवाली पहुंचे तो कोतवाल ने बताया कि कंप्यूटर खराब है। सुबह आना मुकदमा दर्ज कर लिया जाएगा। दूसरे दिन भी 2 बजे तक उसे बैठाए रखा और कोतवाल दबाव बनाने हेतु बार बार पीड़िता को एक ही शब्द कह रहे थे कि तुम कुछ करोगी तो वो भी मामला दर्ज कराएंगे। तुम भी परेशान हो जाओगी। दूसरी ओर इतना कुछ होने के बावजूद पीड़िता की माँ के फ़ोन पर दबंग धमकी देता रहा और कोतवाल साहब हैं कि पीड़िता को न्याय दिलाने के बजाय दबंग की हिमायत करते हुए पीड़िता के ही जख्मों पर नमक छिड़कते रहे। पीड़िता ने जब देखा कि कोतवाल से न्याय मिलने वाला नहीं है, क्योंकि वे आरोपी के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं, तो वह एस.पी. की चौखट पर पहुंची, मगर वहां भी एस.पी. कोतवाल की भाषा बोलते नज़र आये। उन्होंने भौंहे तान कर कहा कि तुम वहां जांच के लिए गयी थी, जबकि तहरीर में न्यूज़ कवरेज व वर्जन की बात साफ साफ लिखी है। दूसरी ओर उन्होंने कहा कि तुम्हारा मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, जबकि ये बात कोतवाल ने एस.पी. से झूठ ही बताई थी। पत्रकारों की मौजूदगी में एसपी उमेश कुमार सिंह ने जब अपने पीआरओ को निर्देशित किया कि इंस्पेक्टर मनकापुर से पूछकर इन्हें एफआईआर नम्बर बताओ, तो इस दौरान कोतवाल का एक बड़ा झूठ खुलकर सामने आ गया। दरअसल, उन्होंने एसपी को महिला पत्रकार की एफआईआर दर्ज कर लेने की बात पहले ही बता दी थी, जबकि हकीकत यह रही कि वे उस पर सुलह करने का दबाव बना रहे थे। यानी, इस मामले में मनकापुर कोतवाल दद्दन सिंह ने पुलिस अधीक्षक को भी झूठी जानकारी देकर गुमराह करने का काम किया। बावजूद इसके पीड़ित महिला पत्रकार की बातों पर एसपी ने यकीन न करके उन बातों पर यकीन किया जो तोड़ मरोड़ कर कोतवाल ने उन्हें समझाया। हद तो तब हो गयी जब कोतवाल ने पीड़िता की तहरीर के कई शब्दों को भी अपने फाइल से हटा दिया। इस तरह भी कोतवाल ने आरोपी दिनेश के घृणित करतूत पर पर्दा डालने का भरसक प्रयास किया। एस.पी. के आदेश पर कोतवाल ने धारा 323, 504 का मुकदमा दर्ज किया है, जो इन्साफ की खिल्ली उड़ा रहा है।

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